EGO never accept the truth meaning

EGO – never accept the truth – Buddha’s Teaching & Science

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Egoist (अहंकारी) व्यक्ति यह महसूस करता है कि वह सबसे अच्छा(best) है और वह सब कुछ जानता है। अगर उससे सच कहा जाता है, तो वह स्पष्ट रूप से सच्चाई स्वीकार नहीं करता है, यही अहंकारी व्यक्ति की पहचान है।

कुछ लोगों को हमेशा यह महसूस होता है कि उनके जीवन में जो कुछ भी हो रहा है और जो उनकी पसंद के अनुसार नहीं है, उनकी प्रतिक्रिया आमतौर पर यह होगी कि “मैं ही क्यूँ” ? वे खुद से यह सवाल पूछते हैं और इस तरह भाग्य और भगवान को दोष देते हैं। लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि भाग्य जैसी कोई चीज नहीं है, यह किसी ने नहीं लिखी है, लेकिन यह वही है जो आप अपने लिए लिखते हैं। तब यदि आप विश्लेषण करते हैं कि निष्कर्ष कौन निकाल रहा है और आप पाएंगे कि आपका अहंकार ऐसे निष्कर्ष निकालता है जो सत्य से बहुत दूर है।

कुछ अहंकार के रूप हैं –
एक पिता को उम्मीद है कि उसका बेटा उसके अहंकार(Ego) के अनुसार होगा,

एक गर्ल फ्रेंड को उम्मीद है कि उसका बॉय फ्रेंड उसके अहंकार(Ego) के अनुसार होना चाहिए,

एक पति को उम्मीद है कि उसकी पत्नी उसके अहंकार(Ego) के अनुसार होगी और

अंत में सभी को उम्मीद है कि दूसरे को अपने अहंकार के अनुसार होना चाहिए।

अहंकार मूल रूप से मानव मन को नियंत्रित कर रहा है।

यदि आप चाहते हैं कि जीवन सुंदर हो, तो आपको प्रत्यक्ष, पारदर्शी होना चाहिए, दिखावा नहीं करना है, हेरफेर नहीं करना है, गणना नहीं करना है और अहंकार को कभी भी सच्चाई से दूर नहीं होने देना है।

संक्षेप में

‘हमारे पास प्रेम और अहंकार के बीच अंतर समझने की क्षमता होनी चाहिए’।

‘प्रेम हमेशा ‘सॉरी’ कहने के लिए तैयार है और एगो हमेशा ‘सॉरी’ सुनना चाहता है ‘।

मूल श्रोत (Source): Linkedin

There is no Path to Happiness, Happiness is the Path – Gautam Buddha

What is Karma? A Small Story about Karma

You can learn more buddha teaching from the book – “Buddha and His Message”

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